भगवान विष्णु मंत्र से आपके जीवन से दुखों को दूर करे

भगवान विष्णु त्रिदेवों में से एक है जो दुनिया के पालनकतॉ है उन को प्रसन्न करके हम अपनी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। भगवान विष्णु मंत्र के द्वारा हम भगवान विष्णु को प्रसन्न कर सकते हैं।

प्राचीन ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु त्रिदेवों में से एक देव हैं। त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु, और महेश। ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता हैं, विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता और महेश सृष्टि के संहारक हैं।

भगवान विष्णु - Lord Vishnu

हमें इस संसार में जो कुछ भी चाहिए उसे विष्णु ही प्रदान करते हैं वही इस सृष्टि को चलाते हैं और लोगों की इच्छाओं की पूर्ति करते हैं।

भगवान विष्णु ने इस सृष्टि को बचाने के लिए कई अवतार लिए हैं जैसे कि भगवान राम, भगवान कृष्ण, परशुराम इत्यादि। जब भी इस सृष्टि को भगवान की आवश्यकता होगी विष्णु एक नया अवतार लेकर इस दुनिया में अवतरित होते रहेंगे। पौराणिक कथाओं के अनुसार विष्णु जी ने अभी तक 10 अवतार लिए हैं।

भगवान विष्णु को नारायण के नाम से भी जाना जाता है जोकि वैकुंठ लोक के निवासी हैं। प्राया वैकुण्ठ लोक में भगवान विष्णु एक बहुत विशाल समुंद्र क्षीर सागर में शेषनाग के ऊपर लेटे हुए दर्शाया जाता हैं और लक्ष्मी जी भगवान विष्णु के चरणों के पास बैठी हैं।

उनके नीचे वाले बाएं हाथ में कमल का फूल और दूसरे हाथ में कमोदीका का नमक गदा होती है। भगवान विष्णु के ऊपरवाले बाएं हाथ में शंख और दाहिने हाथ में सुदर्शन चक्र धारण करते हैं। विष्णु जी गरुण की सवारी करते हैं।

भगवत गीता में श्री कृष्ण ने भगवान विष्णु का विशाल रूप दिखाया था जिसको बहुत ही सुंदर तरीके से भगवत गीता में बताया गया है । इस संसार में जो कुछ भी होता है वह भगवान विष्णु की कृपा से ही होता है भगवान विष्णु अपने भक्तों को मोक्ष और इस संसार में किस तरह जिया जाए उसका मार्ग भी दिखाते हैं।

अगर आपको धन धान्य संपत्ति की कामना है तो भी आपको विष्णु मंत्र का जाप करना चाहिए। जैसा कि कहा जाता है जहां विष्णु है वही लक्ष्मी निवास करती हैं इसलिए विष्णु को प्रसन्न करके आप लक्ष्मी को भी प्रसन्न कर सकते हैं ।

वैसे तो भगवान विष्णु की पूजा रोज ही की जा सकती है पर गुरुवार विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है। गुरुवार को सत्यनारायण भगवान के नाम से व्रत और पूजा की जाती है।

भगवान विष्णु मंत्रों के द्वारा हम अपने जीवन में आ रहे विघ्नों को दूर कर सकते हैं। चलिए जानते हैं भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के कुछ महत्वपूर्ण मंत्र

भगवान विष्णु मंत्र - Lord Vishnu Mantra

भगवान विष्णु मंत्र

 

1. भगवान विष्णु मूल मंत्र

 

ॐ नमोः नारायणाय॥

Om Namoh Narayanaya॥

अर्थ – मैं सर्वशक्तिमान भगवान को नमन करता हूं।

मंत्र के लाभ – इस मंत्र के जाप के कारण हम इस संसारिक दुनिया के मोह से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं और जीवन मरण की चिंता से मुक्त हो जाते हैं।

2. वासुदेवाय मंत्र

 

ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥

Om Namoh Bhagawate Vasudevaya॥

अर्थ – मैं उस भगवान को नमन करता हूं जो सब के दिलों में निवास करते हैं।

मंत्र के लाभ – इस मंत्र के जाप करने से मन में दया भावना जागृत होती है और दूसरों के प्रति प्रेम भाव बढ़ता है।

इस मंत्र को 1,3, या 5 माला का जाप करना चाहिए।

3. विष्णु शांताकरम मंत्र (Vishnu Shantakaram Mantra)

 

शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥

Shantakaram Bhujagashayanam Padmanabham Suresham
Vishvadharam Gaganasadrisham Meghavarnam Shubhangam।
Lakshmikantam Kamalanayanam Yogibhirdhyanagamyam
Vande Vishnum Bhavabhayaharam Sarvalokaikanatham॥

अर्थ – मैं भगवान विष्णु को नमन करता हूं जो इस सृष्टि के पालक और रक्षक हैं, जो शांतिपूर्ण है, जो विशाल सर्प के ऊपर लेटे हुए हैं जिनकी नाभि से कमल का फूल निकला हुआ है जो ब्रह्मांड का सृजन करता है, जो एक परमात्मा है, जो पूरी सृष्टि को चलाने वाला है, जो सर्वव्यापी है जो बादलों की तरह सांवले हैं जिनकी आंखें कमल के समान है, वही समस्त संपत्तियों के स्वामी हैं, योगी जन उनको समझने के लिए ध्यान करते हैं, वह इस संसार के भय का नाश करने वाले हैं, सब लोगों के स्वामी भगवान विष्णु को मेरा नमस्कार।

मंत्र के लाभ – जो इस मंत्र का नियमित जाप करता है वह निडर बन जाता है क्योंकि यह मंत्र अवास्तविक दुनिया के डरो से बाहर निकालने का काम करता है।

इस मंत्र का जाप सुबह जल्दी उठकर करना चाहिए भगवान की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाकर भगवान को पानी व प्रसाद प्रस्तुत करना चाहिए और इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

4. श्री विष्णु मंत्र (Shri Vishnu Mantra)

 

त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।
त्वमेव विद्या द्रविणम् त्वमेव त्वमेव सर्वम् मम देव देव ॥

Tvameva Maataa Ca Pitaa Tvameva Tvameva Bandhush-Ca Sakhaa Tvam-Eva

Tvameva Viidyaa Dravinnam Tvam-Eva Tvameva Sarvam Mama Deva Deva.

अर्थ – हे भगवान आप ही मेरे माता हैं आप ही मेरे पिता हैं आप ही मेरे मित्र हैं आप ही मेरे भाई हैं आप ही संपत्ति हैं आप ही ज्ञान है मैं आप नहीं अपने मोक्ष को देखता हूं ।

मंत्र के लाभ – इस मंत्र के जाप के द्वारा भक्त ध्यान शक्ति प्राप्त कर सकता है और भगवान विष्णु स्वयं ही उसका मार्गदर्शन करते हैं ।

5. मंगलम भगवान विष्णु मंत्र

 

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

Mangalam Bhagwan Vishnuh, Mangalam Garunadhwajah।
Mangalam Pundari Kakshah, Mangalaya Tano Harih॥

अर्थ – भगवान विष्णु का मंगल हो, जिसके ध्वज में गरुड़ हैं उसका मंगलमय हो, जिसके कमल जैसे नेत्र हैं उसका मंगलमय हो, उस प्रभु हरि का मंगलमय हो।

मंत्र का लाभ – हर शुभ कार्य की शुरुआत करने से पहले किस मंत्र का जाप करना चाहिए। पूजा, विवाह, आरती के समय इस मंत्र का जाप करने से सब कार्य शुभ होते हैं।

6. विष्णु गायत्री मंत्र

 

ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

Om Shri Vishnave Cha Vidmahe Vasudevaya Dhimahi।
Tanno Vishnuh Prachodayat॥

अर्थ – ओम, मुझे भगवान विष्णु पर ध्यान केंद्रित करने दे, हे भगवान विष्णु मुझे उच्च विद्या दें, और भगवान विष्णु मेरे मस्तिष्क को प्रकाशित करें।

इन मंत्रों का जाप करने की उच्चतम विधि है कि स्नान करने के बाद देवालय में भगवान विष्णु की प्रतिमा के आगे दीया जलाकर और प्रसाद चढ़ा कर इन मंत्रों का जाप करें ।

 

इन सभी मंत्रों का जाप 1, 3, 5, 11 माला मैं किया जा सकता है।

भगवान विष्णु आपकी सभी मनोकामना पूरी करें और आपके जीवन से दुखों को दूर करें।

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